7 वजह जो आपकी कुंडली में दोष बनके आपकी शादी में रूकावट ला सकती हैं

जन्म कुंडली के बारे में आप सब लोग जानते हैं कि किसी भी व्यक्ति की उसके जन्म के समय बनायी गयी कुंडली उसके जीवन भर के महत्वपूर्ण होती है जीवन में बहुत बार हमें जन्म कुंडली की जरुरत पड़ती है. जब भी हमें व्यक्ति के बारे में किसी भी प्रकार की उसके जीवन से जुडी हुयी ज्योतिष संबंधी जानकारी की आवश्यकता होती है तो हम कुंडली से ही इस समस्या का हल निकाल पाते हैं. इसी प्रकार जब हिन्दू रीति रिवाजों के अनुसार जो शादियाँ होती हैं, तो इस तरह की शादियाँ बिना कुंडली के मिलाये नहीं होती है.

हमारे यहाँ हिंदुस्तान में बिना कुंडली मिलाये और गुण दोषों और बिना योग के शादियाँ नहीं होती हैं. इसलिए कुंडली का होना बहुत जरुरी है. कुल मिलाकर शादी करने के लिए आपके पास जन्म कुंडली होनी चाहिए. कहते हैं कई बार शादी वक़्त पर न होने का कारण कोई कुंडली दोष भी हो सकता है. उसके बाद फिर कुंडली देख कर पता चलता है कि दोष है या नहीं. और उसके बाद फिर आसानी से हल निकल आता है. तो दोस्तो समझ गए न कि कितना जरुरी है कुंडली का होना और उससे भी जरुरी है कि कहीं उसमें दोष न हो।

शादी के लिए कुंडली मिलाने का होता है रिवाज 

जब भी कोई शादी फिक्स होती है तो उससे पहले लड़का और लड़की की कुंडली का मिलन होता है और इस मिलान के आधार पर ही शादी का फिक्स होना लगभग जरुरी होता है. क्योंकि कुंडली से लड़का और लड़की के गुण गुणों को मिलान किया जाता है इसमें ३६ गुण देखे जाते हैं जिनके आधार पर ही शादी फिक्स होती है. लेकिन अगर कुंडली में कोई दोष हुआ तो गुणों का मिलना संभव शायद नहीं भी होता है. और ऐसा नहीं होता है तो इससे आपकी शादी की प्लानिंग फ़ैल होना भी कुंडली दोष ही कारण बनता है।

मंगल कुंडली दोष

कहते हैं जिसकी कुंडली में मांगलिक दोष होता है उसके ज्यदातर कार्यों में मंगल दोष का होना बाधा पहुंचाता है. कहते हैं अगर कुंडली में मांगलिक दोष है तो यह दोष उस व्यक्ति के लिए बेहद खतरनाक होता है. जिसकी कुंडली में कुंडली ओढ़ होता है उनके अगर ३६ गुण भी हुए तो भी विवाह होने के बाद ये लोग अकसर साथ नहीं रह पाते हैं और रिश्ता बिखर जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल कुंडली के 1, 2, 4, 7, 8 या 12 वें स्थान पर हो तो यह मंगल दोष होता है और इस तरह के व्यक्ति को मांगलिक कहा जाता है।

नाड़ी दोष

नाड़ी दोष भी हमारी कुंडली का एक हिस्सा है कहते हैं अगर लड़का और लड़की की यदि एक ही तरह की नाड़ी से संबधित हैं तो ऐसे जोड़े की शादी नहीं करनी चाहिए क्योंकि एक ही नाडी से संबंधित लड़के और लड़की की कुंडली में नाडी दोष बन जाता है. अगर इस तरह की स्थिति है तो इस दोष से शादी में परेशानियां आती हैं. कुंडली में ‘नाड़ी दोष’ के होने से पार्टनर की आपस में नहीं बनती, विवाह में रूकावट, घर में अक्सर झगड़े होते हैं और परिवार में संतान का अभाव रहता है।

भकूट दोष

ऐसा कहा जाता है कि भकूट दोष कुंडली के गुण मिलान से बनने वाले दोषों में से बहुत गंभीर दोष माना जाता है। ज्यादातर ज्योतिष कुंडली मिलान में भकूट दोष के बनने पर विवाह न करने का सलाह देते हैं। और इसीलिए हमें कुंडली मिलान के समय भकूट दोष के बारे में जानकारी जरुर करनी चाहिए. कहते हैं भटूक दोष जिनकी कुंडली में होता है उनकी शादी जरुर प्रभावित होती है. ‘भकूट दोष’ आपकी शादी को प्रभावित करता है और गर्भधारण और परिवार में बच्चे के जन्म की संभावना को कम जाती है। इसका प्रभाव भी लंबे समय तक शादीशुदा जिंदगी पर बना रहता है।

गण दोष

अन्य दोषों की तरह ही गण दोष भी कुंडली में होता है जब शादी के लिए लड़का और लड़की की कुंडली का मिलान करते हैं तो गण मिलाने पर हमारे गुणों के ३६ नंबरों में ६ नंबर हमें गण मिलने पर प्राप्त होते हैं लेकिन अगर ये ६ अंक नहीं मिल पाते हैं तो फिर इसे गण दोष मान लिया जाता है. ज्योतिष के अनुसार गण तीन होते हैं जिन्हें हम क्रमश: देव गण, मानव गण और राक्षस गण के नाम से जानते हैं। हर गण से नौ नक्षत्र सबन्ध रखते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दोष को दूर किये बिना किया गया रिश्ता सही सलामत नहीं चल पाता है।

तारा दोष

विवाह के लिए मिलाये जाने वाली कुंडली में गुणों का मिलान करने पर प्रात होने वाले अंकों में ३ अंक तारा मिलाने पर प्राप्त होते हैं. अन्य की तरह ही यदि ये अंक प्राप्त नहीं हो पाते हैं तो कहा जाता है कि जब तक ये दोष कुंडली से दूर न हो जाए तब तक शादी के लिए उचित समय नहीं होता है. या फिर किसी दूसरी कुंडली के साथ मिलान कर सकते हैं अगर वहां से आपका कुंडली मिलान सही होता है तो फिर शादी की जा सकती है. जातक की कुंडली के इस भाग से जुड़े नक्षत्रों को अलग अलग तारों के नामों से जाना जाता है।

योनि दोष

जब विवाह के लिए कुंडली मिलान किया जाता है तो हमारे अष्ट कूटों में योनि कूट से हमें ४ अंक प्राप्त होते हैं. योनि कूट के लिए कहा जाता है कि इस के लिए चन्द्र नक्षत्र का मिलान किया जाता है. कोई भी नक्षत्र का संबंध किसी न किसी पशु से होता है और इसी जीव को इस नक्षत्र की योनि कहा जाता है. वर और वधु की कुंडली मिलान के लिए चन्द्र नक्षत्र की योनि को वर व वधु की योनि कहा जाता है. अगर यहाँ ४ अंक नहीं मिलते हैं या औसत अंक भी नहीं मिलते हैं तो कहते हैं कि इस विवाह को न करना ही ठीक होता है।\

कुछ जरुरी बातें

आपने ऐसे केस भी देखे होंगे कि जब विवाह कुंडली मिलान के साथ अच्छे से खूब सारे गुणों को मिलाने के बाद किया जाता है और ऐसे विवाह भी देखे होंगे जिनमें न कोई कुंडली मिली न किसी पंडित का सहारा लिया गया और शादी हो गयी. लेकिन जब बाद में देखते हैं तो विपरीत देखने को मिलता है कि कुंडली वाली शादी फेल हो जाती है और बिना कुंडली वाली सफल हो जाती है. वो इसलिये कि हम गुण मिलाने में लगे रहते हैं जबकि वर वधु की कुंडली में सभी नवग्रहों, राशियों तथा नक्षत्रों का अध्ययन करना जरुरी होता है उसके बाद ही कुंडली मिलान किया जा सकता है और सही स्थिति का पता किया जा सकता है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *