“लोकतंत्र को खतरा” जिम्मेदार कौन……सरकारें, प्रशासन या व्यक्तिगत स्वार्थ?

साल 2014, देश की जनता ने एक ऐसा प्रधानमंत्री दिल्ली की गद्दी पर बैठाया जिसे बाहरी देशों की ताकतें प्रधानमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहती थीं। यहाँ तक कि अमेरिका ने भी जिसे प्रधानमंत्री बनने के पहले तक वीजा देना उचित नहीं समझा। लेकिन जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिल्ली की कुर्सी पर आये तो बहुत कुछ बदला। नरेन्द्र मोदी की अगुआई में भारतीय जनता पार्टी ने देश में खूब विस्तार किया और वर्तमान देश की सबसे बड़ी पार्टी बन गई। लेकिन कुछ कार्य ऐसे हुए जब ये लगने लगा कि वास्तव में लोकतंत्र खतरे में है। हालाँकि “लोकतंत्र को खतरा” कर्नाटक चुनाव परिणाम के बाद स्पष्ट हो गया। (Viral Hindi news)

ऐसा क्या हुआ कर्णाटक में

कर्णाटक में इस महीने विधानसभा चुनाव हुए और परिणाम भी आया। 222 सीटों पर हुए चुनाव का स्पष्ट परिणाम भी आ गया जिसमें बीजेपी को 104 सीटें हाथ लगीं वहीँ कांग्रेस ने राहुल गाँधी के प्रतिनिधित्व में 78 सीटें जीत लीं। जेडीएस पार्टी को इस चुनाव में 38 सीटें मिलीं। चुनाव परिणाम के बाद अब सरकार बनाने की तैयारी की प्रक्रिया चल ही रही थी कि अचानक से बीजेपी ने बोला कि उनकी तरफ से येदियुरप्पा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे और अगले दिन राज्यपाल ने शपथ दिला भी दी। इस चुनाव में इन तीनों पार्टियों के अलावा 2 निर्दलीय विधायक भी चुनाव जीतकर आये हैं। (latest Hindi News)

राज्यपाल के फैसले पर उठी ऊँगली

कर्णाटक में सरकार बनाने के लिए करीब 118 सीटों की जरुरत होती है जो कि ना तो कांग्रेस और जेडीएस के पास ही थीं और ना ही देश विस्तारित पार्टी बीजेपी के पास थीं। इसका मतलब कोई भी पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं थी। अब समझ में ये नहीं आया कि राज्यपाल ने बहुमत देखे बिना 104 सीटों के साथ येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद की शपथ क्यों दिलाई, ऊपर से बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय भी दिया गया, क्यों? क्या राजपाल भी चाहते हैं देश में राजनीतिक खरीद फ़रोख्त पहले की तरह आगे भी हमेशा चलती रहे। (karnatak chunav news)

मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

कांग्रेस और जेडीएस दोनों का आपस में गठबंधन हो गया जिसके बाद इस गठबंधन के पास कुल सीटें 116 हो जाती हैं और इसके साथ निर्दलीय विधायक मिला दिए जाएँ तो सरकार बनाने के लिए बहुमत पूरा हो जाता है। जब कर्णाटक में गठबंधन सरकार बनाना चाहता है तो राज्यपाल ने बीजेपी को बिना बहुमत के मुख्यमंत्री शपथ क्यों दिलाई। (Latest Hindi News)

एक दिन का मुख्यमंत्री

हालाँकि येदियुरप्पा एक दिन के मुख्यमंत्री बनकर काफी खुश दिखे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी अगर विपक्ष में बैठकर कार्य करती तो शायद भविष्य में उन्हें एक अच्छी सरकार बनाने का मौका मिल सकता था बीजेपी जीत की ख़ुशी बर्दास्त नहीं कर पाई और आरोपों तले दब गई। क्या राज्यपाल पर किसी तरह का दवाब था अगर नहीं तो फिर कर्णाटक राज्यपाल का फैसला प्रशासनिक क्यों नहीं लगता? (Hindi Breaking News)

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *