बच्चों के रोने के सात कारण और उनको संभालने के उपाय

बच्चों का रोना वैसे तो एक सामान्य सी बात है क्योंकि जब तक कोई शिशु बड़ा नहीं हो जाता है तब तक वो आपसे अपनी कोई बात सिर्फ रोकर ही कह सकता है। ऐसे में माता पिता के लिए जरुरी हो जाता है कि वो अपने शिशु के रोने की वजह के बारे में जानें। और रोने की वजह कुछ भी हो सकती है। ऐसे में कई बार माता पिता के लिए बहुत ही मुश्किल हो जाता है उन्हें समझ ही नहीं आता है कि आखिर उनका बच्चा क्या कहना चाहता है। तो दोस्तो आइये जानते हैं बच्चों के रोने के कारण और उन्हें चुप कराने के उपाय- 

शारीरिक समस्या के कारण

बच्चा यदि रोये जा रहा है और चुप होने का नाम नहीं ले रहा है तो हो सकता है उसे कोई शारीरिक समस्या हो जैसे कि पेट दर्द का होना या फिर ठीक से चल न पाने की वजह से कोई चोट का दर्द होना जिसके बारे में आपको न पता हो। ऐसी स्थिति में आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए। यही सबसे बेहतर उपाय है।

 डाईपर गीला होने पर

कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जिन्हें गंदगी बिलकुल भी पसंद नहीं होती और वो अपना डाईपर गीला होते ही रोना शुरू कर देते हैं। तो बच्चे के रोने पर उसका डाईपर चेक करें कि कहीं वो गीला तो नहीं है और ऐसी स्थिति में डाईपर को तुरंत बदलें। बच्चे को हर समय डाईपर में भी नहीं रखें और उसे ज्यादा टाइट भी न बाधें।

 गोद में जाने के लिए

कई बार बच्चे अपने माँ बाप को देखते ही रोने लगते हैं क्योंकि उस शिशु को गोद में जाना होता है ताकि वो अपने माँ बाप या किसी अन्य व्यक्ति की गोद में जाकर उसकी आवाज सुन सके। बच्चे अपने माँ बाप की धड़कन भी सुनना चाहते हैं। इसलिए कभी भी बच्चे के रोने पर उसे सबसे पहले थोड़ी देर कसकर सीने से लगायें और फिर गोद में ले लें।

 भूख लगने पर

जब शिशु को भूख लगती है तो वो रोना शुरू कर देता है और अपनी माँ को इधर उधर खोजते हुए रोता रहता है ऐसे में बच्चे को तुरंत दूध पिलायें। यदि उसके रोने का कारण भूख होगी तो वो जरुर चुप हो जाएगा।

 नींद पूरी न होने पर

बच्चे यदि नींद पूरी नहीं कर पाते हैं या फिर उन्हें दिन में ज्यादा देर तक सुला दिया जाता है तो बच्चे चिडचिडे स्वभाव के हो जाते हैं और रात में नींद न आने की वजह से रोने लगते हैं और दिन में उन्हें कोई डिस्टर्ब करता है तो रोने लगते हैं क्योंकि उन्हें दिन में सोने की आदत जो होती है। इसलिए ऐसी स्थिति में बच्चे की सोने की टाइमिंग का विशेष रूप से ध्यान रखें।

 मौसम से प्रभावित होने के कारण

जब भी किसी शिशु को सर्दी या गर्मी में बहुत ज्यदा गर्मी या सर्दी लगने लगती है तो शिशु रोने लगता है ऐसे में माता पिता को ध्यान रखना चाहिए कि वो मौसम के अनुसार बच्चे के पहनावे पर ध्यान दें और उसे मौसम के अनुकूल वातावरण में रखें।

 प्यार पाने के लिए

कई बार बच्चे घर के किसी भी व्यक्ति को देखते ही रोने लगते हैं क्योंकि वो उनका प्यार पाना चाहते हैं उनका मन होता है कि वो व्यक्ति या उसके माँ बाप उसे गोद में लेकर दुलारें उसकी पीठ थपथपाएं या फिर उसे लोरी सुनाएं। ऐसी करने से बच्चे को शारीरिक आराम मिलता है इस समय आप बच्चे की मालिश भी कर सकती हैं। दुलार करने से बच्चे को नींद भी आ जाती है और आप दूसरे काम भी कर सकती हैं।

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